आज उत्तर प्रदेश मैं चुनाव का मौसम चल रहा है। सभी लोग बता रहे हैं की उनकी विचारधारा क्या है सभी पार्टी काफी पुरानी है लकिन अभी तक जनता को उनकी विचारधारा और उनके सिद्धांत नही पता । समाजवाद गांधीवाद अम्बेडकरवाद हिंदूवाद क्या ये वाद सभी जनता से वोट लेने के लिये है जो हम अपने जीवन अपना नही रहे उसके नाम पर वोट माग रहे हैं समाज वादी पार्टी सिल्वर जुबली क्या समाजवाद की सिल्वर जुबली थी या मुग़ल वाद की जहाँ चाचा भतीजे सत्ता के लिए लड़ रहे है वो समाज वाद की बात करते हैं लोहिया जी का नाम लेने वाले खुद लोहिया बनने की कोशिश करते नही है अम्बेडकर जी की बात करने वाले कभी अम्बेडकर बनने की कोशिश नही करते जब हम वो बन ना नही चाहते तो उनके नाम प र वोट क्यं मांगते हैं अम्बेडकर लोहिया गाँधी का एक अंश भी किसी मैं नही है ये तो बही बात होगयी की अहिंसा का भाषण हाथ मैं हथियार लेकर देना सभी समाज वादी एक हो जाओ लोहियावादी एक हो जाओ गाँधी वादी एक हो जाओ भाषण देने वाले खुद कितना उनके रस्ते पर चलते है क्या लोहिया अम्बेडकर का नाम लेते समय इनको शर्म नही आती मुख्यमंत्री कहते हैं कुछ लोग पार्टी मैं भ्र्स्ताचारी है पार्टी अध्यक्ष कहते है कुछ लोग सरकार मैं मलाई खा रहे जमीन कब्जा चुके है एक चचा को पार्टी से निकल दिया राष्ट्रीय अध्यक्ष कहते हैं वो ७ साल जेल जाने वाले थे जब पार्टी के लोग एक दूसरे पर लूट का आरोप लगा रहे हैं तो लोहियावादी होने का दावा कैसे क्र सकते है मायावती जी की पार्टी मैं कोई दूसरा दलित नही बन पाया बड़ा नेता। जब दलितों को अपनी पार्टी मैं स्थान नही दे सकती तो कैसा दलित प्रेम । महापुरषों के सिद्धान्त का हवाला देने वाले लालू यादव कभी खुद भी बता सकते की वो कितने उनके रस्ते चलते हैं सभी सिद्धन्त गरीब जनता के लिए ही क्यं । राजनीति को अपनी नोकरी समझ क्र ही करो उतना भी काफी है जनता को आपकी सेवा नही चाहये जिसके दम पर राजनेता मेवा खाते आज उत्तर प्रदेश एक मुग़ल वादी सोच से ग्रस्त है जिससे उत्तर प्रदेश की जनता ही मुक्ति दिल सकती है
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