Wednesday, 9 November 2016

EK YUDHH YE BHI....

शब्बाश  भारतीयों  जब से कल कला धन के खिलाफ युद्ध की घोषणा हुई है कुछ हमारे सिपाही हार मन गए अगर हमारी सेना को पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की बात हो हम लोग बड़े जोश मैं बोल दे ते हैं युद्ध हो पाकिस्तान को उडा दो क्यं की हम तो शहीद होंगे नही हमर तो कोई अपना जीवन देश के लिए देगा नही तो फेसबुक पर शुरू कर देते हैं                                          
                                          आज जब देश के अंदर कला धन के खिलाफ  एक युद्ध मैं हमको लड़ने के बोला गया तो हम अपनी तकलीफ बता रहे हैं बैंक कोन जाये कोन कुछ समय कार्ड स्वीप करके शॉपिंग करे  कोण बैंक की लाइन मैं लगे हमें  देश भक्ति की बाते करना अच्छा लगता है लकिन देश के लिए मेहनत करना नही ये जो समस्या है ज्यादा से ज्यादा २ महीने की भी नही है लकिन सीमा पर हमरे महान सैनिक अपना काम क्र रहे हैं वो भी अपने जीवन का बलिदान देकर। अब हमको भी महान भारतीय बनने का मौका मिला देश के लिए लड़ने के लिए इसमें हमें अपना जीवन नही देना
                                                           अगला कुछ समय बड़ा ही नाजुक है देश के लिए हमसभी मिल कर लड़े तो जीत जायंगे जो की हमारे शहीदो के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी 

Saturday, 5 November 2016

SILVER JUBILEE SAMAJWAD OR PARIVARWAD

आज  उत्तर  प्रदेश  मैं चुनाव का मौसम  चल रहा है। सभी लोग बता रहे हैं की उनकी विचारधारा क्या  है सभी पार्टी काफी पुरानी है  लकिन अभी तक जनता को उनकी विचारधारा  और उनके सिद्धांत  नही पता । समाजवाद गांधीवाद अम्बेडकरवाद हिंदूवाद क्या ये वाद सभी जनता से वोट लेने के लिये  है  जो हम अपने जीवन अपना नही रहे उसके नाम पर वोट माग रहे हैं समाज वादी  पार्टी सिल्वर जुबली क्या समाजवाद की सिल्वर जुबली थी या मुग़ल वाद  की जहाँ चाचा भतीजे सत्ता के लिए लड़ रहे है वो समाज वाद  की बात करते हैं लोहिया जी का नाम लेने वाले खुद लोहिया बनने की कोशिश करते नही है अम्बेडकर  जी की बात करने वाले कभी अम्बेडकर बनने की कोशिश नही करते जब हम वो बन ना  नही चाहते तो उनके नाम प र वोट क्यं मांगते हैं अम्बेडकर लोहिया गाँधी का एक अंश भी किसी मैं नही है ये तो बही बात होगयी की अहिंसा का भाषण  हाथ मैं हथियार  लेकर देना सभी समाज वादी एक हो जाओ लोहियावादी एक हो जाओ गाँधी वादी एक हो जाओ भाषण  देने वाले खुद कितना उनके रस्ते पर चलते है क्या लोहिया अम्बेडकर का नाम लेते समय इनको शर्म नही आती मुख्यमंत्री कहते हैं कुछ लोग पार्टी मैं भ्र्स्ताचारी है पार्टी अध्यक्ष कहते है कुछ लोग सरकार मैं मलाई खा रहे जमीन कब्जा चुके है एक चचा को पार्टी से निकल दिया राष्ट्रीय अध्यक्ष कहते हैं वो ७ साल जेल जाने वाले थे जब पार्टी के लोग एक दूसरे पर लूट का आरोप लगा रहे हैं तो लोहियावादी होने का दावा कैसे क्र सकते है मायावती जी की पार्टी मैं कोई दूसरा दलित नही बन पाया बड़ा नेता। जब दलितों को अपनी पार्टी मैं स्थान नही दे सकती तो कैसा दलित प्रेम । महापुरषों के सिद्धान्त का हवाला देने वाले लालू यादव कभी खुद भी बता सकते की वो कितने उनके रस्ते चलते हैं सभी सिद्धन्त गरीब जनता के लिए ही क्यं । राजनीति को अपनी नोकरी समझ क्र ही करो उतना भी काफी है जनता को आपकी सेवा नही चाहये जिसके दम पर  राजनेता मेवा खाते  आज उत्तर प्रदेश एक मुग़ल वादी सोच से ग्रस्त है जिससे उत्तर प्रदेश की जनता ही मुक्ति दिल सकती है